अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि परिसर में धार्मिक उत्साह और भक्ति के माहौल के बीच शिव मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच ध्वज फहराया। इससे पूर्व उन्होंने भगवान शिव का रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर राष्ट्र के कल्याण का आशीर्वाद लिया। परिसर के अन्य उपमंदिरों में भी ध्वज आरोहण की प्रक्रिया जारी है, जिसमें माता भगवती मंदिर पर साध्वी ऋतंभरा और शेषावतार मंदिर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ध्वज फहराएंगे।
ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान प्रकृति की परीक्षा भी देखने को मिली। शाम 4:45 बजे निर्धारित कार्यक्रम के समय अयोध्या में अचानक मौसम बदल गया। तेज हवाओं, रिमझिम बारिश और घने बादलों की वजह से मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर राम कथा पार्क में लैंड नहीं कर सका, जिसे सुरक्षा कारणों से महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारना पड़ा। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से शाम 5:17 बजे मंदिर परिसर पहुंचे, जहाँ संघ, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा के लगभग 1000 आमंत्रित प्रतिनिधियों ने उनका भव्य स्वागत किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने जब इस आंदोलन की कमान संभाली, तब यह एक विराट जन-आंदोलन बन गया। इस अभियान ने समाज में जाति की दीवारों को पूरी तरह तोड़ दिया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज दुनिया के किसी भी कोने में जाने पर लोग हमें देखते ही 'जय श्री राम' का जयघोष करते हैं, जो इस आंदोलन की वैश्विक सफलता का प्रतीक है।
इतिहास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से ठीक 298 साल पहले वह काली रात आई थी जब मंदिर को अपवित्र कर विवादित ढांचा खड़ा किया गया था, लेकिन सनातन समाज ने एक भी दिन मंदिर के संकल्प को अपनी यादों से ओझल नहीं होने दिया। उन्होंने इस अभियान को दुनिया का सबसे अनूठा आयोजन बताया, जिसमें वनवासी से लेकर राजमहल में रहने वाले हर सनातनी के मन में केवल एक ही अभिलाषा थी—प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर। आज वह सपना पूर्ण वैभव के साथ साकार हो रहा है।