अयोध्या न्यूज डेस्क: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार (19 मार्च 2026) को कहा कि अयोध्या की पवित्र भूमि को स्पर्श करना उनके लिए सर्वोच्च सम्मान की बात है। उन्होंने अयोध्या को प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि बताते हुए कहा कि रामराज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सद्भाव का सर्वोच्च प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने चैत्र नवरात्रि के पहले दिन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के पहले दिन यहां उपस्थित होना बेहद शुभ क्षण है। उन्होंने मंदिर से जुड़े भूमि पूजन, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार के उद्घाटन और ध्वजारोहण जैसे पड़ावों को देश की संस्कृति और इतिहास के महत्वपूर्ण मील के पत्थर बताया।
उन्होंने कहा कि देश एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से 2047 तक या उससे पहले इन लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में विकसित भारत और समावेशी समाज का सपना रामराज्य की अवधारणा से जुड़ा हुआ है।
राष्ट्रपति ने कहा कि रामराज्य का आदर्श जीवन में समावेशी दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है और इसके जरिए नैतिकता और मूल्यों पर आधारित राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या की आध्यात्मिक भावना अब सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे देश में फैल चुकी है और यह भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है।
इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम यंत्र की स्थापना हर सनातन धर्म के अनुयायी और हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राम मंदिर से जुड़े सभी कार्य—भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार की स्थापना और अब श्रीराम यंत्र की स्थापना—देश की गहरी आस्था को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों ने आस्था को अंधविश्वास बताकर उसका अपमान किया। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों से अडिग रही यह आस्था हर चुनौती के बाद भी मजबूत रही और अंततः जीत हासिल की। आज अयोध्या उसी आस्था और भारत की सभ्यतागत चेतना का प्रतीक बनकर सामने है।