फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री एक बार फिर चर्चा में हैं, और इस बार वजह है उनका एक पुराना वीडियो, जिसे उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर शेयर किया। इस वीडियो में उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान अपनी फिल्म The Bengal Files को लेकर सामने आई मुश्किलों का जिक्र किया। अग्निहोत्री ने दावा किया कि फिल्म की रिलीज के दौरान उन्हें कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा, यहां तक कि उन्हें राज्य में ‘बैन’ तक कर दिया गया।
अपने लंबे कैप्शन में उन्होंने कहा कि फिल्म को सिनेमाघरों से हटा दिया गया और उन्हें बंगाल में एंट्री की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रेलर लॉन्च को रोका गया, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं और उन्हें अवॉर्ड लेने तक नहीं जाने दिया गया। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक फिल्म की लड़ाई नहीं थी, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बन गया था। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव के दौरान उन्होंने ‘अंडरग्राउंड’ तरीके से लोगों तक फिल्म पहुंचाने की कोशिश की।
हालांकि, इस पूरे मामले का एक दूसरा पहलू भी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से फिल्म पर कोई आधिकारिक बैन नहीं लगाया गया था। बल्कि कई सिनेमाघरों ने आपसी निर्णय से फिल्म को स्क्रीन न करने का फैसला लिया था। यह स्पष्ट नहीं है कि इसके पीछे क्या कारण थे, लेकिन इस स्थिति ने फिल्म, राजनीति और सेंसरशिप के बीच की जटिलताओं को जरूर उजागर किया।
‘द बंगाल फाइल्स’ की कहानी 1940 के दशक के बंगाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है, खासकर Great Calcutta Killings के दौर को दिखाती है। यह वह समय था जब समाज में विचारधाराओं, धर्म और सत्ता की टकराहट अपने चरम पर थी। फिल्म इसी संघर्ष को बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश करती है, जो स्वाभाविक रूप से संवेदनशील बहसों को जन्म देती है।
कुल मिलाकर, यह विवाद सिर्फ एक फिल्म या एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल की ओर इशारा करता है—क्या सिनेमा सिर्फ मनोरंजन है या समाज का आईना भी? और जब यह आईना असहज सच्चाइयों को दिखाता है, तो क्या हम उसे देखने के लिए तैयार होते हैं?
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