अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में 300 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण के लिए हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि बिना पुनर्वास या मुआवजा दिए दुकानदारों को हटाना बेहद निंदनीय है। कोर्ट ने साफ किया कि अस्पताल बनाना जनहित का काम है, लेकिन अपनी दुकानों से रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना बेघर नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि दुकानदारों को हटाने से उनके आजीविका के अधिकार पर असर पड़ता है। इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 से जुड़े सवाल भी उठते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि दुकानदारों को पट्टे पर दुकानें आवंटित की गई थीं, इसलिए वे पट्टाधारक हैं। पट्टे खत्म किए बिना उन्हें दुकानें खाली करने का आदेश देना उचित नहीं था। कोर्ट के मुताबिक, प्रभावित दुकानदारों को या तो दूसरी जगह बसाने की व्यवस्था की जाए या उनके नुकसान की भरपाई की जाए।
यह आदेश मोहम्मद नईम समेत छह दुकानदारों की याचिका पर आया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सीतापुर आई हॉस्पिटल सोसाइटी, फैजाबाद ने साल 2000 में उन्हें 30 साल के पट्टे पर दुकानें दी थीं। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 28 फरवरी 2000 को उन्हें दुकानों का कब्जा भी मिल गया था। दुकानदारों का कहना है कि लागू नियमों के तहत हर 30 साल में पट्टे का नवीनीकरण किया जाना था।
मामले ने तब तूल पकड़ा, जब अयोध्या के जिलाधिकारी ने 26 जून 2025 को नोटिस जारी कर दुकानदारों को 15 दिनों के भीतर दुकानें खाली करने का निर्देश दिया। नोटिस में कहा गया था कि जमीन और दुकानें चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग को सौंप दी गई हैं। इसके बाद दुकानदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने उस समय अधिकारियों को दुकानदारों के आवेदन पर फैसला होने तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। हालांकि, जिलाधिकारी ने 31 जुलाई 2026 के आदेश में कहा कि अस्पताल निर्माण के लिए जमीन की जरूरत है और दुकानदारों को वहां बने रहने का अधिकार नहीं है।
अब हाईकोर्ट ने राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को दुकानदारों के पुनर्वास के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह हलफनामा तीन सप्ताह के भीतर सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी को दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।