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अयोध्या राम मंदिर की जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, स्वतंत्र जांच के लिए समिति बनाने की मांग

Photo Source : Google

Posted On:Saturday, October 31, 2026

अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में बने राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि एक समिति या आयोग बनाया जाए, जो यह जांच करे कि राम मंदिर उसी जमीन पर बना है या नहीं, जिसका फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के अपने फैसले में किया था।

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इस फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ किया गया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में किसी प्रमुख जगह पर मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने का भी निर्देश दिया था। सर्वसम्मति से दिए गए फैसले में कोर्ट ने कहा था कि जहां पहले बाबरी मस्जिद थी, वहां की 2.77 एकड़ विवादित जमीन केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगी और तीन महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट को सौंप दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि 2019 के फैसले में तय की गई जमीन का स्वतंत्र सर्वे कराया जाए। इसमें जमीन की सही सीमाओं, निर्देशांकों, क्षेत्रफल और जगह की पहचान की जाए। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी सुनवाई की सूची के मुताबिक, श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट की यह याचिका 2 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आएगी।

याचिका में कोर्ट से एक स्वतंत्र समिति या आयोग बनाने की मांग की गई है। इसमें सर्वे, राजस्व, पुरातत्व और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। इस समिति का काम यह पता लगाना होगा कि मौजूदा राम मंदिर उसी जमीन पर बना है या नहीं, जिसका फैसला सुप्रीम कोर्ट ने किया था। याचिका में कहा गया है कि अगर जांच में दोनों जमीनों के बीच कोई बड़ा अंतर मिलता है, तो 2019 के फैसले को सही तरीके से लागू करने के लिए जरूरी निर्देश दिए जाएं।

याचिका में संबंधित अधिकारियों और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर परिसर से जुड़े सभी पुराने दस्तावेज, नक्शे, योजनाएं, सर्वे और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और कोर्ट में पेश करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। इसके अलावा, दुनियाभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं बनाने की मांग भी की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि मंदिर में मिलने वाले दान, चढ़ावे और रसीदों का रोजाना डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए और इसकी जानकारी लगातार सार्वजनिक की जाए। साथ ही, गड़बड़ी रोकने के लिए भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से हर साल खातों का ऑडिट कराने की मांग की गई है।

बता दें कि 16वीं सदी में बनी बाबरी मस्जिद अयोध्या की विवादित जमीन पर थी। 6 दिसंबर 1992 को हिंदू कारसेवकों ने इसे गिरा दिया था, जिसके बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। सुप्रीम कोर्ट का 2019 का फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर आया था। हाई कोर्ट ने चार दीवानी मुकदमों में 2.77 एकड़ जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर बांटने का आदेश दिया था।


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