अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में सरयू नदी इस समय उफान पर है। पहाड़ों में लगातार हुई बारिश और नेपाल के बैराजों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी के कारण गुप्तार घाट की सीढ़ियों तक नदी का पानी पहुंच गया है। हालांकि सरयू अभी अपने किनारों के भीतर ही बह रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गुप्तार घाट वही स्थान है, जहां भगवान राम ने सरयू में जल समाधि ली थी। वहीं कुछ किलोमीटर दूर राम जन्मभूमि मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आम दिनों में भी हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं, जबकि त्योहारों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है।
लेकिन सरयू किनारे बैठे स्थानीय लोगों के लिए अयोध्या के बढ़ते तीर्थ पर्यटन की तस्वीर कुछ अलग है। पिछले तीन साल से यहां फोटोग्राफी करने वाले कपिल यादव बताते हैं कि पहले वह रोज करीब 200 से 300 तस्वीरें खींच लेते थे, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 100 रह गई है। एक तस्वीर के 10 रुपये मिलते हैं और फोटो तुरंत डेटा केबल से ग्राहक को दे दी जाती है। कपिल का कहना है कि हाल की विवादित घटना से लोगों में निराशा आई है और शायद इसी वजह से श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई हो। हालांकि अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी इस बात से सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक, रोजाना मिलने वाले आंकड़ों के अनुसार इस साल श्रद्धालुओं की संख्या पिछले साल के मुकाबले 10 से 20 प्रतिशत ज्यादा है।
जिलाधिकारी के अनुसार, सामान्य दिनों में राम मंदिर में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि सप्ताहांत में यह संख्या करीब एक लाख हो जाती है। त्योहारों पर करीब तीन लाख लोग पहुंच सकते हैं और कुंभ के दौरान सबसे ज्यादा पांच लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि मंदिर में मिलने वाले दान में भी कोई कमी नहीं आई है। राम जन्मभूमि मंदिर की नई मंदिर मजिस्ट्रेट और एसडीएम वंदना पांडेय ने भी कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ पहले जैसी ही है। उनके मुताबिक, फिलहाल तेज धूप और गर्मी की वजह से भीड़ कुछ कम नजर आ सकती है। राम नवमी और दिवाली जैसे मौकों पर स्थिति ऐसी होती है कि खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती। हाल में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर हुए विवाद को उन्होंने एक अलग और सीमित घटना बताया और कहा कि इसका श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है।
हालांकि स्थानीय दुकानदारों और कामगारों की उम्मीद सिर्फ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या से नहीं जुड़ी है। गुप्तार घाट पर पिछले सात-आठ साल से जूस बेच रहे दशरथ निषाद का कहना है कि अयोध्या में आने वाला पैसा शहर के दूसरे धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने में भी लगाया जाना चाहिए। बेहतर पेयजल, बैठने की जगह और रोशनी जैसी सुविधाएं बढ़ेंगी तो लोग ज्यादा समय शहर में बिताएंगे और छोटे कारोबारियों को भी फायदा होगा। वहीं अयोध्या में जन्मे खुर्शीद आलम नगर निगम से जुड़े काम करते हैं और लाइट व साउंड का सामान संभालने से करीब 11 हजार रुपये महीने कमाते हैं। उनका कहना है कि शहर बदल रहा है, नई चीजें आ रही हैं और लोग भी बढ़ रहे हैं, लेकिन इस बदलाव से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कमाई के मौके भी बढ़ने चाहिए। यही अयोध्या की असली तस्वीर है—प्रशासन श्रद्धालुओं की गिनती कर रहा है, मंदिर आस्था की बात कर रहा है, जबकि स्थानीय लोग ग्राहकों, कमाई और रोजगार के जरिए शहर के विकास को देख रहे हैं।