अयोध्या न्यूज डेस्क: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव और वरिष्ठ विश्व हिंदू परिषद नेता चंपत राय ने 18 अगस्त को जारी अपने नौ पन्नों के लेख में राम मंदिर निर्माण को लेकर कई अहम दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का प्रोजेक्ट पर लगभग पूरा नियंत्रण था और वह निर्माण से जुड़े सभी फैसलों में खुद को मुख्य अधिकारी मानते थे। चंपत राय के मुताबिक, मिश्रा की मंजूरी के बिना मंदिर निर्माण का कोई काम नहीं होता था।
चंपत राय ने अपने लेख में लिखा कि नृपेंद्र मिश्रा ने अपनी पसंद के कई लोगों को मंदिर निर्माण समिति में शामिल किया था। इनमें पूर्व एनबीसीसी चेयरमैन अनूप मित्तल नियमित रूप से बैठकों में शामिल होते थे, जबकि एक सदस्य पिछले छह साल में सिर्फ एक-दो बार अयोध्या आया। उनके अनुसार, निर्माण समिति की बैठक आमतौर पर हर महीने और कुछ समय तक 15 दिन में एक बार होती थी। चंपत राय का दावा है कि समिति के फैसले के बिना कोई काम आगे नहीं बढ़ता था और उसके बाहर लिए गए फैसलों को भी स्वीकार नहीं किया जाता था।
हालांकि, चंपत राय ने नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका की आलोचना करने के साथ-साथ मंदिर निर्माण में उनकी अहम भूमिका की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के सामने जब भी कोई मुश्किल आई, मिश्रा ने संबंधित क्षेत्र के देश के सक्षम विशेषज्ञों को अयोध्या बुलाकर समस्या का समाधान कराया। लेख के मुताबिक, एलएंडटी को निर्माण एजेंसी और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट नियुक्त किया गया था। मंदिर के आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा को 1986 में दिवंगत वीएचपी नेता अशोक सिंघल ने चुना था और बाद में भी उन्हें इस काम से जोड़े रखा गया।
चंपत राय के मुताबिक, मंदिर का निर्माण जून 2020 में कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुआ और जून 2026 तक पूरा कर इसे समाज को समर्पित कर दिया गया। उन्होंने इस पूरी उपलब्धि में नृपेंद्र मिश्रा के प्रयासों को अहम बताया। लेख में 70 एकड़ के मंदिर परिसर के विकास, आसपास की इमारतों, छोटे मंदिरों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, संग्रहालय, गेस्ट हाउस, ऑडिटोरियम और सुरक्षा दीवार समेत कई निर्माण कार्यों का भी जिक्र किया गया है। यह लेख ऐसे समय सामने आया है जब मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंदा गबन के आरोपों की जांच के बाद चंपत राय को एसआईटी से क्लीन चिट मिलने की खबरें आई थीं और वह जुलाई में ट्रस्ट के महासचिव पद से हट गए थे।
कांग्रेस ने कहा- मामला सिर्फ दो नेताओं की बयानबाजी नहीं
चंपत राय के लेख के बाद कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नृपेंद्र मिश्रा के पुराने बयानों का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि राम मंदिर में कथित ‘चंदा चोरी’ के आरोप सामने आने पर मिश्रा ने इसे ट्रस्ट पर लगा दाग बताया था। मिश्रा ने द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की जरूरत भी बताई थी और कहा था कि भक्तों के पैसे का इस्तेमाल हुआ है, इसलिए खर्च किए गए हर रुपये का हिसाब सामने आना चाहिए।
पवन खेड़ा ने कहा कि अब चंपत राय ने मंदिर निर्माण के तरीके के लिए नृपेंद्र मिश्रा को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इसे सिर्फ दो लोगों के बीच बयानबाजी मानने के बजाय इसके पीछे बड़ी राजनीतिक लड़ाई होने का दावा किया। खेड़ा ने आरोप लगाया कि नृपेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी हैं, जबकि चंपत राय आरएसएस से जुड़े हैं और इसे नरेंद्र मोदी बनाम मोहन भागवत की लड़ाई के रूप में पेश किया। यह टिप्पणी कांग्रेस नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और लेख में किए गए चंपत राय के दावों से अलग उनका आकलन है।