अयोध्या न्यूज डेस्क: घर में बने अखाड़े से कुश्ती की शुरुआत करने वाली आजमगढ़ की खुशबू यादव आज अपनी मेहनत के दम पर पदक जीत रही हैं। सीमित संसाधनों और गांव में लोगों की रोक-टोक के बावजूद उन्होंने पहलवान बनने का सपना नहीं छोड़ा। उनके पिता ट्रक चलाकर परिवार का खर्च उठाते हैं, वहीं खुशबू कुश्ती में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं। पिछले तीन साल से वह अयोध्या के डाभासेमर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय क्रीड़ा संकुल में अभ्यास कर रही हैं। अब तक वह अलग-अलग प्रतियोगिताओं में करीब 20 पदक जीत चुकी हैं, जिनमें लगभग पांच पदक प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं के हैं।
आजमगढ़ की रहने वाली खुशबू छह भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। उनके पिता दयाराम यादव ट्रक चालक हैं और मां सरोज देवी घर संभालती हैं। खुशबू के मन में कुश्ती के लिए लगाव अपने बाबा शिव आसरे यादव को देखकर पैदा हुआ। घर में अखाड़ा था, जहां वह बचपन से अपने बाबा और दूसरे लोगों को कुश्ती लड़ते देखती थीं। धीरे-धीरे इस खेल में उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी और उन्होंने भी पहलवान बनने का सपना देखना शुरू कर दिया।
परिवार के साथ से आगे बढ़ीं खुशबू
खुशबू ने आजमगढ़ में एक-दो महीने तक कुश्ती का अभ्यास किया। इसके बाद डाभासेमर स्टेडियम के लिए उनका चयन हो गया और वह बेहतर तैयारी के लिए अयोध्या आ गईं। हालांकि, कुश्ती में आगे बढ़ने के फैसले पर उन्हें गांव में लोगों की रोक-टोक का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार ने उनका साथ नहीं छोड़ा। इसी सहयोग ने उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखने की ताकत दी।
खुशबू का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए खुद पर भरोसा करना सबसे जरूरी है। उनका कहना है कि माता-पिता को भी बच्चों की प्रतिभा पहचाननी चाहिए और उन्हें अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। उनकी चचेरी बहन साक्षी यादव भी कुश्ती का अभ्यास कर रही हैं। खुशबू अब इस खेल में बड़ी पहचान बनाना चाहती हैं, ताकि अपनी मेहनत और हुनर के दम पर भविष्य संवार सकें।