अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में 15 अगस्त से 12 दिवसीय सावन झूला मेला शुरू होने जा रहा है। सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन मणिपर्वत मेले के साथ रामलला पहली बार मंदिर से बाहर निकलकर राम मंदिर परिसर के कुबेर टीला पर झूला झूलेंगे। उन्हें चांदी के भव्य झूले पर विराजमान कराया जाएगा और सामने गायन-वादन होगा। इसके साथ ही करीब 100 मंदिरों से भगवान के विग्रह मणिपर्वत पहुंचेंगे।
राम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास ने बताया कि 15 अगस्त को कुबेर टीला पर झूला झुलाने के बाद 16 अगस्त से रामलला मंदिर परिसर में ही झूले पर विराजमान होंगे। सावन पूर्णिमा तक श्रद्धालु श्रृंगार आरती के बाद से शयन आरती तक झूले पर विराजमान रामलला के दर्शन कर सकेंगे। यह वही विग्रह होगा, जो बालकराम की प्राण प्रतिष्ठा से पहले गर्भगृह में भक्तों को दर्शन देता था।
कनक भवन, दशरथ महल, मणिराम दास छावनी, श्रीरामवल्लभाकुंज, बड़ा भक्तमाल, रंगमहल, रामहर्षण कुंज और हनुमत निवास समेत करीब 100 मंदिरों से 15 अगस्त को शोभायात्रा मणिपर्वत पहुंचेगी। सोने-चांदी और लकड़ी की पालकियों में भगवान के विग्रह सजाए जाएंगे। मणिपर्वत पर पेड़ों की डालियों से झूले लगाए जाएंगे, जहां संत गायन, वादन और नृत्य के जरिए भगवान की आराधना करेंगे। मेले में करीब 2 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। भीड़ को देखते हुए 15 अगस्त की दोपहर से प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और बदलाव लागू किए जाएंगे।
अयोध्या की रसिक परंपरा में झूला उत्सव का खास महत्व माना जाता है। जानकीघाट बड़ा स्थान के महंत जनमेजय शरण के मुताबिक, इस परंपरा में संत-महंत सीता जी को बहन का भाव मानकर भगवान श्रीराम के साथ अपनापन और हास-परिहास करते हैं। उन्हें मधुर गीत सुनाए जाते हैं और भोजन व शयन की सेवा की जाती है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम को झूले पर देखने के लिए भगवान शिव समेत कई देवता भी अयोध्या आते हैं। दशरथ महल से भी भगवान की पालकी मणिपर्वत जाएगी और झूलनोत्सव के बाद उन्हें वापस लाकर सावन पूर्णिमा तक झूले पर विराजमान किया जाएगा।