अयोध्या न्यूज डेस्क: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ के चयन को लेकर चल रहा विवाद अब पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय की सफाई के बाद नया मोड़ लेता दिख रहा है। सोमवार को आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने राजेश पांडेय के एक पॉडकास्ट का हवाला देते हुए सीईओ चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसके बाद राजेश पांडेय ने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट और पॉडकास्ट के वीडियो क्लिप शेयर कर कहा कि उनके बयान को गलत और भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा है।
राजेश पांडेय ने साफ किया कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया था कि वह सीईओ पद के टॉप तीन उम्मीदवारों में शामिल थे। उन्होंने बताया कि पॉडकास्ट में भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्हें ट्रस्ट या किसी आधिकारिक स्रोत से इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी। टॉप तीन उम्मीदवारों को लेकर जो चर्चा उनके सामने आई थी, वह अखबारों और सोशल मीडिया के जरिए मिली थी। ऐसे में उनके बयान को आधार बनाकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाना सही नहीं है।
सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू को लेकर भी राजेश पांडेय ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है कि जितेंद्र मिश्रा इंटरव्यू देने आए ही नहीं थे। राजेश पांडेय के मुताबिक, 11 अगस्त को जिस समय उनका खुद का इंटरव्यू स्लॉट था, उस दौरान उन्होंने जितेंद्र मिश्रा को वहां नहीं देखा था। उन्होंने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि जितेंद्र मिश्रा का इंटरव्यू हुआ ही नहीं था और न ही उन्होंने ऐसा कोई दावा किया था।
दरअसल, अमिताभ ठाकुर ने सोमवार को राजेश पांडेय के पॉडकास्ट का हवाला देते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि अगर जितेंद्र मिश्रा टॉप 16 में शामिल नहीं थे और इंटरव्यू में भी नहीं आए थे, तो फिर सीईओ पद के लिए उनका चयन किस आधार पर हुआ। पत्र सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। अब राजेश पांडेय ने खुद सामने आकर दोनों दावों को गलत बताते हुए कहा है कि राम मंदिर सीईओ की नियुक्ति को लेकर उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।