अयोध्या न्यूज डेस्क: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर परिसर को केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में फैले इस परिसर में आधुनिक तकनीकों के साथ प्रकृति और पारिस्थितिकी संतुलन को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
ट्रस्ट के अनुसार कुल भूमि का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हरियाली और खुले क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखा गया है, जबकि निर्माण कार्य सीमित दायरे में ही किया गया है। परिसर की हरित व्यवस्था की जिम्मेदारी जीएमआर संस्था को सौंपी गई है, जिसके तहत रामायणकालीन पौधों, नक्षत्र वाटिका, पंचवटी और विभिन्न फलदार वृक्षों का व्यापक रूप से रोपण किया गया है। साथ ही नर्सरियों का भी विकास किया जा रहा है।
भूमि अधिग्रहण के दौरान परिसर में मौजूद कई पेड़ों को काटने के बजाय दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। इनमें से कुछ पेड़ जीवित रहे, जबकि सूख चुके पेड़ों के स्थान पर नए पौधे लगाए गए हैं, जिससे हरियाली को निरंतर बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
जल संरक्षण के लिए परिसर में दो जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें एक जलाशय सप्त मंडपम क्षेत्र में विकसित किया गया है, जहां कमल के विभिन्न प्रजातियों का रोपण हो रहा है, जबकि दूसरा गहरा जलाशय कुबेर नवरत्न टीला के पीछे तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही एसटीपी से शोधित जल का उपयोग बागवानी में किया जा रहा है और वर्षा जल संचयन के लिए 40 रिचार्ज पिट भी बनाए गए हैं।
स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के लिए तीन अलग-अलग संस्थाओं को जिम्मेदारी दी गई है। बीवीजी इंडिया लिमिटेड परिसर और परकोटे के मंदिरों की सफाई संभाल रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यूनीप्वाइंट और जिलाजीत संस्थाएं कार्यरत हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था भी एक अलग एजेंसी के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिससे परिसर को स्वच्छ और सुव्यवस्थित बनाए रखा जा सके।