अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर में दान के पैसे और दूसरे चढ़ावे की गिनती को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और सख्त की जा रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कैश काउंटिंग में लगे कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली ड्रेस का इंतजाम किया है। इसके साथ ही संवेदनशील जगहों पर मोबाइल फोन और निजी सामान ले जाने पर भी रोक लगाई गई है। इन बदलावों का मकसद दान की गिनती के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश कम करना है।
यह बदलाव ट्रस्ट के पहले सीईओ एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद किए जा रहे प्रशासनिक बदलावों का हिस्सा हैं। जीतेंद्र मिश्रा को 2 सितंबर को सीईओ नियुक्त किया गया था और उन्होंने 21 सितंबर को अयोध्या में अपना पद संभाला। उनके जिम्मे ट्रस्ट के प्रशासन, मंदिर की व्यवस्थाओं, सुरक्षा और श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं की निगरानी है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब मंदिर के चढ़ावे की गिनती और रखरखाव को लेकर कथित चोरी और अनियमितताओं की जांच चल रही है।
दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की एंट्री से पहले और बाहर निकलने के बाद जांच की जा रही है। काउंटिंग एरिया में मोबाइल फोन, कैमरा, बैग और निजी सामान ले जाने की अनुमति नहीं है। कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की फ्रिस्किंग भी सख्त की गई है और सीसीटीवी से निगरानी बढ़ाई गई है। ट्रस्ट ने दान की गिनती में इंसानी दखल कम करने के लिए आईआईटी और दो बैंकों से मिले टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम के प्रस्तावों पर भी विचार किया है।
वहीं, दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच एसआईटी भी कर रही है। हाल में एसआईटी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें कई आरोपियों के नाम शामिल हैं, जबकि ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा को गवाह के तौर पर रखा गया है। ऐसे में ट्रस्ट की नई व्यवस्था में कर्मचारियों की जांच, सीसीटीवी निगरानी, निजी सामान पर रोक और दान की गिनती में तकनीक के इस्तेमाल पर खास जोर दिया जा रहा है।