अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी मामले के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने गुरुवार को करीब 200 प्रमुख संतों के साथ बैठक की। इस बैठक में अयोध्या की छवि, राम मंदिर ट्रस्ट में संतों की भूमिका और दान चोरी मामले के बाद की स्थिति पर चर्चा हुई।
बैठक में आरएसएस के प्रांत प्रचारक कौशल किशोर और वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक श्रीराम सत्संग भवन, मणिराम दास छावनी में आयोजित की गई।
बैठक के दौरान संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मुख्य समिति में अयोध्या के प्रमुख संतों को प्रतिनिधित्व देने और एक प्रमुख संत को ट्रस्टी बनाए जाने की मांग उठाई। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब एक दिन पहले ही ट्रस्ट की पुनर्गठित धार्मिक समिति में अयोध्या के पांच संतों को शामिल किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अयोध्या की छवि को दोबारा मजबूत करने और दान चोरी विवाद के बाद श्रद्धालुओं का भरोसा कायम रखने पर विशेष जोर दिया गया। संतों ने मंदिर की पूजा-पद्धति में वैष्णव-रामानंदी परंपरा का पालन सुनिश्चित करने की भी बात कही।
बैठक में शामिल संत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि दान चोरी मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की है। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन राम मंदिर के खिलाफ दुष्प्रचार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई और दोषी पाया जाता है तो उसे भी कानून के तहत सजा मिलेगी।
महंत कमल नयन दास ने दान चोरी मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को मंदिर की छवि खराब करने की कोशिश बताया। वहीं महंत रमानंद दास ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या की प्रतिष्ठा बढ़ी है और संतों को किसी भी तरह के दुष्प्रचार से सावधान रहना चाहिए।
बैठक में कई संतों ने कहा कि दान चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इससे राम मंदिर की आस्था और सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश नहीं होने दी जानी चाहिए। उन्होंने सभी सनातन धर्म अनुयायियों से एकजुट रहने की अपील की।
इस बीच, ट्रस्ट में तीन ट्रस्टी पद अभी भी खाली हैं। इनमें पूर्व ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली हुआ पद और पूर्व महासचिव चंपत राय तथा ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे से रिक्त हुए दो पद शामिल हैं। ट्रस्ट की हालिया बैठक में इन पदों पर नियुक्ति का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है।
गौरतलब है कि जून में राम मंदिर दान चोरी के आरोप सामने आने के बाद एसआईटी जांच के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी। अब तक इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने जांच के दौरान नकदी, सोना, चांदी, विदेशी मुद्रा और "रामराज्य कोष" लिखा एक दान पात्र भी बरामद किया है।