अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या पहुंचे आईएमए (IMA) कानपुर के 50 डॉक्टरों के दल को संबोधित करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय ने शहर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अयोध्या सिर्फ एक प्राचीन नगरी ही नहीं, बल्कि मोक्ष देने वाली भूमि भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह स्थान हिंदू परंपराओं के कई महान प्रणेताओं का केंद्र रहा है, जिसके बारे में दुनिया को बहुत कम जानकारी है।
चम्पत राय ने डॉक्टरों को मंदिर विवाद की गहराई समझाते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ 1450 वर्ग मीटर जमीन के टुकड़े के लिए नहीं थी, बल्कि यह भारत के स्वाभिमान और गौरव को बचाने की लड़ाई थी। उन्होंने बताया कि 1935 तक चले जमीनी संघर्ष के बाद 1949 से यह मामला कानूनी प्रक्रिया में उलझ गया था। हिंदू समाज का हमेशा से यह मानना था कि एक विदेशी आक्रांता ने जानबूझकर मंदिर को ध्वस्त कर वहां ढांचा खड़ा किया था।
उन्होंने अदालती कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि बाबर ने बंजर जमीन पर मस्जिद बनवाई थी, लेकिन न्यायालय ने मुख्य रूप से यह जांचा कि 1528 में वहां पहले से कुछ मौजूद था या नहीं। इसी जांच ने हिंदू पक्ष की जीत का रास्ता साफ किया क्योंकि सच्चाई उनके साथ थी। महासचिव ने यह भी बताया कि अयोध्या केवल भगवान राम की ही नहीं, बल्कि गुरु नानक देव, गौतम बुद्ध और जैन तीर्थंकरों की भी पावन धरती है।
इस विशेष दौरे के दौरान डॉक्टरों के दल ने हनुमानगढ़ी, कनक भवन और दशरथ महल जैसे प्रमुख मंदिरों के दर्शन किए और सरयू आरती में भी भाग लिया। आईएमए के इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. वीसी रस्तोगी ने किया था और इसमें कानपुर के कई वरिष्ठ चिकित्सक शामिल हुए। आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा और सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने महासचिव का स्वागत कर कार्यक्रम का सफल संचालन किया।