अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर और दीघा के जगन्नाथ धाम के इर्द-गिर्द घूमती बंगाल की चुनावी राजनीति पर आधारित यह रिपोर्ट है। नीचे दी गई जानकारी को 4 अनुच्छेदों में प्रस्तुत किया गया है:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनवरी 2024 में अयोध्या के राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के ठीक एक साल बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 30 अप्रैल 2025 को दीघा में 'जगन्नाथ धाम' का उद्घाटन किया था। इस मंदिर के निर्माण को बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। ममता बनर्जी ने इस 250 करोड़ रुपये की लागत वाले भव्य मंदिर के जरिए उन हिंदू मतदाताओं को साधने की कोशिश की है, जो पिछले कुछ चुनावों में भाजपा की ओर झुके थे।
तृणमूल कांग्रेस ने जगन्नाथ धाम के प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से घरों तक मंदिर का प्रसाद और तस्वीरें पहुंचाईं, ताकि धार्मिक भावनाओं को चुनावी समर्थन में बदला जा सके। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के लिए राम मंदिर का मुद्दा अयोध्या (फैजाबाद सीट) में ही विफल रहा था, जिसे देखते हुए अब दीघा में यह सवाल उठ रहा है कि क्या जगन्नाथ धाम ममता बनर्जी की चुनावी नैया पार लगा पाएगा।
मंदिर के उद्घाटन के एक साल पूरे होने पर मुख्य पुजारी राधारमण दास ने बताया कि अब तक देश-विदेश से लगभग 1.33 करोड़ श्रद्धालु यहाँ आ चुके हैं। हालांकि, चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण इस बार वर्षगांठ का उत्सव सादगी से मनाया गया और मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं हो सकीं। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की राय भी बंटी हुई है; कुछ का मानना है कि इस भव्य निर्माण से ममता बनर्जी को हिंदू वोट मिलेंगे, जबकि कुछ इसे केवल आस्था का केंद्र मानते हैं जिसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
राजनीतिक स्तर पर भाजपा ने ममता बनर्जी पर सरकारी खजाने के दुरुपयोग और 'दिखावे' का आरोप लगाया है, जबकि माकपा (CPM) ने बेरोजगारी और विकास के मुद्दों को दरकिनार कर मंदिर राजनीति करने पर उनकी आलोचना की है। दूसरी ओर, स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मंदिर के कारण पर्यटन और व्यापार में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दीघा का यह धाम ममता बनर्जी के लिए वही राजनीतिक लाभ ला पाएगा जिसकी उनकी पार्टी को उम्मीद है।