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अयोध्या में सामने आई 300 साल पुरानी रामचरितमानस की दुर्लभ पांडुलिपि

Photo Source : Google

Posted On:Monday, April 6, 2026

अयोध्या न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश की अयोध्या से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण खोज सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के लिए लंबे समय से जिस दुर्लभ धरोहर की तलाश थी, वह अब मिल गई है। ‘पांडुलिपि संरक्षण यज्ञ’ अभियान के अंतर्गत रामचरितमानस की लगभग 300 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि प्रकाश में आई है, जिसे बेहद अनमोल माना जा रहा है।

यह पांडुलिपि अमेठी निवासी जगजीत सिंह के पास वर्षों से सुरक्षित रखी गई थी। कुमारगंज क्षेत्र में रहने वाले जगजीत सिंह ने अब इसे संग्रहालय में संरक्षित करने के लिए आवेदन किया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पांडुलिपि देवनागरी लिपि में लिखी गई है और इसकी प्राचीनता इसे ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। फिलहाल संग्रहालय प्रशासन इसकी जांच और सत्यापन में जुटा हुआ है।

संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने बताया कि गहन परीक्षण और अध्ययन के बाद ही इसे आधिकारिक तौर पर संग्रह में शामिल किया जाएगा। वहीं नृपेंद्र मिश्र के मार्गदर्शन में संग्रहालय को ‘रिपोजिटरी सेंटर’ के रूप में विकसित किया गया है, जहां देशभर से प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों को एकत्र करने का अभियान जारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पांडुलिपि केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि भाषा और इतिहास के अध्ययन के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। इससे प्राचीन देवनागरी लिपि की संरचना और लेखन शैली को समझने में नई जानकारी मिलेगी। यदि इसकी प्रामाणिकता सिद्ध हो जाती है, तो यह खोज भारतीय सांस्कृतिक धरोहर में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज होगी।


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