अयोध्या न्यूज डेस्क: लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खुलती नजर आ रही है, जहां सड़कों पर बने कट (Cuts) हादसों का मुख्य केंद्र बन गए हैं। हाईवे पर पर्याप्त रोशनी, ब्लिंकर्स और संकेतकों का अभाव वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। विडंबना यह है कि शासन और जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार बैठकें और मॉनिटरिंग के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है।
बाराबंकी जिला मुख्यालय से महज सात किलोमीटर दूर रसौली कट पर बदहाली का आलम यह है कि करीब एक महीने पहले किसी वाहन की टक्कर से रोड लाइट के पोल, ब्लिंकर और संकेतक क्षतिग्रस्त हो गए थे। एक माह बीत जाने के बाद भी इन्हें ठीक नहीं कराया जा सका है, जिससे रात के समय यहां हादसों का खतरा बना रहता है। इसी तरह चौपुला कट की स्थिति भी दयनीय है, जहां चालकों को सतर्क करने वाले सुरक्षा बोर्ड टूटकर गिरे पड़े हैं।
अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। हाईवे के रखरखाव और सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से तैनात निजी कंपनी की है। तकनीकी रूप से हाईवे को सुरक्षित रखने का जिम्मा इन्हीं एजेंसियों का है, लेकिन क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत न होना सीधे तौर पर लापरवाही को दर्शाता है।
सीओ यातायात आलोक पाठक ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि क्षतिग्रस्त लाइटों और संकेतकों की देखरेख का काम NHAI का है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि रसौली और चौपुला सहित अन्य स्थानों पर टूटे हुए ब्लिंकर्स और पोल को फिर से स्थापित करने के लिए विभाग की ओर से औपचारिक सिफारिश भेजी जाएगी। तब तक यात्रियों को इन अंधेरे और असुरक्षित कटों पर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।