अयोध्या न्यूज डेस्क: अयोध्या की पावन धरा पर कंकरीले रास्तों और चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना 84 कोसी परिक्रमा (84 Kosi Parikrama) पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रही है। विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व और सुरेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में चल रही यह यात्रा मंगलवार को तारुन के रास्ते होते हुए सूर्यकुंड रामपुर भगन पहुँची। यहाँ की खास बात यह रही कि स्थानीय ग्रामीणों ने पूरी आत्मीयता के साथ श्रद्धालुओं का स्वागत किया और उन्हें जलपान कराकर उनकी थकान मिटाने की कोशिश की। आस्था का सैलाब इस कदर उमड़ा है कि विपरीत परिस्थितियाँ भी भक्तों के कदम नहीं रोक पा रही हैं।
सूर्यकुंड के बाद परिक्रमा दल सीता कुंड पहुँचा, जहाँ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। यहाँ स्थानीय समाज और भक्तों ने परिक्रमा में शामिल साधु-संतों का विशेष सम्मान किया। श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक भोजन का प्रबंध किया गया, जिसके बाद सभी ने कुछ समय विश्राम किया। इस यात्रा में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 700 श्रद्धालु शामिल हैं, जो राम नाम का जाप करते हुए कठिन रास्तों को सुगम बना रहे हैं। यह परिक्रमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि देश की सांस्कृतिक एकता को भी दर्शाती है।
हालांकि, श्रद्धा के इस महाकुंभ में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। परिक्रमा मार्ग पर पेयजल, साफ-सफाई और स्नान के लिए समुचित प्रबंध न होने के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। अव्यवस्थाओं के चलते भीषण गर्मी में कई श्रद्धालुओं की तबीयत भी खराब हुई। राहत की बात यह रही कि स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीम ने मौके पर पहुँचकर बीमार परिक्रमार्थियों का तुरंत उपचार किया, जिससे यात्रा बाधित नहीं हुई। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की मांग की है।
शाम होते ही परिक्रमा का जत्था अपने अगले गंतव्य खेमासराय विद्यालय के लिए रवाना हो गया। यहाँ रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई है, जहाँ भजन-कीर्तन के बाद श्रद्धालु अपनी थकान मिटाएंगे और बुधवार सुबह फिर से अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान करेंगे। अव्यवस्थाओं की शिकायतों के बीच भी परिक्रमार्थियों के चेहरों पर थकान से ज्यादा संतोष और भक्ति के भाव दिखाई दे रहे हैं। यह यात्रा अयोध्या के धार्मिक महत्व और जन-आस्था की गहराई को एक बार फिर प्रमाणित कर रही है।